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हंसगीता Book Cover

हंसगीता

इसमें भगवान्‌ के हंसावतार द्वारा ब्रह्माजी के मानस पुत्रों-सनकादिक ऋषियों की योग की पराकाष्ठा अर्थात्‌ परमार्थतत्त्व-सम्बन्धी जिज्ञासा का समाधान किया गया है। चित्त को विषयों से कैसे पृथक करे इसका गूढ़ तात्विक उपाय इसमें बताया गया है।
ग्रंथकार: व्यास
अध्याय: 1
शास्त्र परिचय
हंसगीता नाम से प्रख्यात गीता श्रीमद्भागवतमहापुराण के एकादश स्कन्ध में भगवान्‌ श्रीकृष्ण द्वारा श्रीउद्धवजी को भक्ति-मुक्ति का उपदेश देते समय वर्णित हुई है। इसमें भगवान्‌ के हंसावतार द्वारा ब्रह्माजी के मानस पुत्रों-सनकादिक ऋषियों की योग की पराकाष्ठा अर्थात्‌ परमार्थतत्त्व-सम्बन्धी जिज्ञासा का समाधान किया गया है। चित्त को विषयों से कैसे पृथक करे इसका गूढ़ तात्विक उपाय इसमें बताया गया है। जिज्ञासुओं को इस गीता में सांख्य, योग तथा वेदान्त की त्रिवेणी दृष्टिगोचर होगी। इसी लघु कलेवर वाली हंसगीता को यहाँ सानुवाद प्रस्तुत किया जा रहा है।
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