गणेशगीता
इस गीता में कर्मयोग, सांख्ययोग, भक्तियोग, योगसाधना, प्राणायाम, मानसपूजा, सगुणोपासना, विभूतियोग, गणेशजी के विश्वरूप का दर्शन, त्रिविध प्रकृति तथा उसके अनुसार जीव की गति आदि अन्यान्य महत्त्वपूर्ण विषयों का वर्णन है, जो साधन एवं तत्त्वज्ञान की दृष्टि से बड़ा कल्याणकारी है।
ग्रंथकार: व्यास
अध्याय: 11