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दुर्गासप्तशती Book Cover

दुर्गासप्तशती

शाक्त शास्त्र वे धार्मिक ग्रंथ हैं जो देवी या शक्ति को परम सत्ता मानते हुए उनकी महिमा, तत्त्वज्ञान, उपासना-पद्धति और साधना का वर्णन करते हैं। इन ग्रंथों में देवी को सृष्टि की मूल शक्ति और जगत की अधिष्ठात्री के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
ग्रंथकार: मार्कण्डेय
अध्याय: 16
शास्त्र परिचय
शाक्त शास्त्र हिन्दू धर्म की शाक्त परम्परा से संबंधित वे ग्रंथ हैं जिनमें देवी (शक्ति) को ब्रह्माण्ड की सर्वोच्च शक्ति माना गया है। इन शास्त्रों में देवी की उत्पत्ति, उनके विभिन्न रूपों, दैत्य-विनाश की कथाओं, आध्यात्मिक तत्त्वज्ञान तथा साधना-विधियों का विस्तृत वर्णन मिलता है। शाक्त परम्परा के अनुसार सम्पूर्ण सृष्टि शक्ति से उत्पन्न होती है और उसी में स्थित रहती है। इसलिए देवी को सृष्टि, स्थिति और संहार की अधिष्ठात्री माना जाता है। इन ग्रंथों में भक्ति, मन्त्र, स्तोत्र, यज्ञ, पूजा-विधि और तांत्रिक साधनाओं का भी वर्णन मिलता है, जिनके माध्यम से साधक देवी की कृपा और आध्यात्मिक सिद्धि प्राप्त करने का प्रयास करता है। प्रमुख शाक्त ग्रंथों में Durga Saptashati (देवी माहात्म्य), Devi Bhagavata Purana, Kalika Purana तथा Lalita Sahasranama जैसे ग्रंथ विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं। ये ग्रंथ देवी उपासना, आध्यात्मिक ज्ञान और शाक्त दर्शन के मुख्य आधार माने जाते हैं।
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