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चतुर्वेद Book Cover

चतुर्वेद

यह उपनिषद चारों वेदों की उत्पत्ति और उनकी आंतरिक एकता को दर्शाता है। इसमें बताया गया है कि परमेश्वर (नारायण) ही समस्त वेदों के मूल स्रोत हैं।
ग्रंथकार: ज्ञात नहीं
अध्याय: 1
शास्त्र परिचय
चतुर्वेदोपनिषद एक महत्वपूर्ण हिंदू दार्शनिक ग्रंथ है। यह उपनिषद चारों वेदों की उत्पत्ति और उनकी आंतरिक एकता को दर्शाता है। इसमें बताया गया है कि परमेश्वर (नारायण) ही समस्त वेदों के मूल स्रोत हैं। मुख्य दार्शनिक बिंदु वेदों की उत्पत्ति: इस ग्रंथ के अनुसार, सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी ने ध्यान लगाते हुए चारों दिशाओं से मुख्य मंत्रों (जैसे गायत्री) का उच्चारण किया, जिससे चारों वेद प्रकट हुए। ब्रह्म और सृष्टि: यह उपनिषद मानता है कि यह संपूर्ण ब्रह्मांड और इसके संचालक (ईश्वर) एक ही हैं। मोक्ष का मार्ग: इसमें बताया गया है कि स्वयं की आत्मा और परमात्मा की एकता को समझ लेने से मनुष्य को परम आनंद और दुखों से मुक्ति मिलती है। महत्व यह मुख्य 10 या 13 उपनिषदों (जैसे ईश, केन, कठ) में नहीं आता, बल्कि यह बाद के उन विशेष उपनिषदों में गिना जाता है जो आध्यात्मिक और धार्मिक साधना के लिए उपयोग किए जाते हैं।
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“जब-जब धर्म की हानि होती है और अधर्म बढ़ता है, तब-तब मैं स्वयं प्रकट होता हूँ”
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