ब्रह्मज्ञानावलीमाला
ब्रह्मज्ञानावलीमाला आत्मज्ञान की ओर ले जाने वाला एक सारग्रंथ है, जो साधक को यह बोध कराता है कि उसका वास्तविक स्वरूप ब्रह्म ही है। अज्ञान के नाश और आत्मबोध के माध्यम से ही मोक्ष की प्राप्ति संभव है—यही इस ग्रंथ का केंद्रीय संदेश है।
ग्रंथकार: आदि शंकराचार्य
अध्याय: 1