प्रातः स्मरणीय गोस्वामी तुलसीदास जी के लिखे दो ग्रन्थ ‘बरवै रामायण’ तथा ‘बरवा रामायण’ मिलते हैं । दोनो ही गोस्वामी जी के रचे हुये माने जाते हैं, यद्यपि दोनो की रचना में पर्याप्त अन्तर दृष्टिगोचर होता है। काशी नागरी प्रचारिणी से छपी तुलसीदास ग्रन्थावली में एक बरवै रामायण दी गयी है उसे ही सर्वमान्य प्रमाणिक रूप से गोस्वामी जी की रचना माना जाता है। गीता प्रेस गोरखपुर द्वारा भी काशी नागरी प्रचारिणी से छपी बरवै रामायण को ही प्रमाणिक मानकर इस पुस्तक का अनुवाद सहित गीताप्रेस संस्करण तैयार किया गया है। यहाँ भी उसी बरवै रामायण को उद्धृत किया गया है।
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