अष्टावक्र गीता
अष्टावक्र गीता अष्टावक्र और जनक के बीच स्व/आत्मा की प्रकृति, वास्तविकता और बंधन पर एक संवाद है। यह अद्वैतवादी दर्शन का एक क्रांतिकारी संस्करण प्रस्तुत करता है। गीता बाहरी जगत की पूर्ण असत्यता और अस्तित्व की पूर्ण एकता पर जोर देती है।
ग्रंथकार: अष्टावक्र
अध्याय: 20