मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
आत्मबोध Book Cover

आत्मबोध

यह उपनिषद् ऋग्वेद से सम्बद्ध है। इसे आत्मप्प्रबोधोपनिषद् भी कहते हैं। इसमें ॐकार रूप नारायण को नमस्कार करते हुए हृदय को ब्राह्मपुर और स्वप्रकाशित कहा गया है। आत्म साक्षात्कार प्राप्त कर चुके साधक की अनुभूतियों का उल्लेख है।
ग्रंथकार: ज्ञात नहीं
अध्याय: 2
शास्त्र परिचय
यह उपनिषद् ऋग्वेद से सम्बद्ध है। इसे आत्मप्प्रबोधोपनिषद् भी कहते हैं। इसमें दो अध्याय हैं। प्रथम अध्याय में ॐकार रूप नारायण को नमस्कार करते हुए हृदय को ब्राह्मपुर और स्वप्रकाशित कहा गया है। हृदय में और सर्वत्र 'प्रज्ञारूप' प्रज्ञानेत्र 'चेतन' का निवास बताया गया है। इस ज्ञान का महत्त्व तथा उसके प्रभाव से नित्य ज्योतित अमरलोक में आवास प्राप्त होने की बात कही गयी है। दूसरे अध्याय में आत्म साक्षात्कार प्राप्त कर चुके साधक की अनुभूतियों का उल्लेख है। गन्ने के रस में व्याप्त शक्कर और समुद्र की लहरों की उपमा देकर ब्रह्म, जगत् और जीव की स्थितियाँ समझायी गयी हैं। आत्मानुभूति की इस अवस्था में सभी लौकिक सम्बन्धों तथा भेदभावों का अस्तित्व समाप्त हो जाने और जीवन्मुक्तावस्था प्राप्त हो जाने की बात कही गयी है।
ऐप में अध्ययन करें
शाश्वत आध्यात्मिक ज्ञान में आत्मनिवेशन करें

पवित्र शास्त्र

प्रामाणिक आध्यात्मिक शिक्षाओं तक पहुँचें

श्लोक व्याख्या

गहन बोध हेतु सुव्यवस्थित व्याख्याएँ पढ़ें

ऑफ़लाइन पढ़ें

कभी भी, कहीं भी अन्वेषण करें
“जब-जब धर्म की हानि होती है और अधर्म बढ़ता है, तब-तब मैं स्वयं प्रकट होता हूँ”
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें