आत्मबोध
यह उपनिषद् ऋग्वेद से सम्बद्ध है। इसे आत्मप्प्रबोधोपनिषद् भी कहते हैं। इसमें ॐकार रूप नारायण को नमस्कार करते हुए हृदय को ब्राह्मपुर और स्वप्रकाशित कहा गया है। आत्म साक्षात्कार प्राप्त कर चुके साधक की अनुभूतियों का उल्लेख है।
ग्रंथकार: ज्ञात नहीं
अध्याय: 2